वर्ष 2024 में पुलिस ने दस हजार से अधिक गंभीर अपराधों की रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई नहीं की, जो कुल रिपोर्टों का लगभग एक चौथाई है। एक लेखा परीक्षक द्वारा यह खुलासा किया गया है कि इन रिपोर्टों को बिना किसी जांच के बंद कर दिया गया था। इन अपराधों में चोरी, डकैती और हिंसा जैसे मामले शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संसाधनों की कमी और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यह जनता की सुरक्षा के प्रति लापरवाही दर्शाता है। इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और पुलिस बल में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
