केंद्र सरकार द्वारा चयनित चार शहरों में ३०,००० से अधिक नए घरों के निर्माण की योजना अधर में लटक गई है। इन शहरों को अभी तक सड़कों और रेलमार्गों के निर्माण के लिए आवश्यक धन प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण आवास परियोजनाओं की शुरुआत में देरी हो रही है। सरकार ने इन शहरों को विकास के लिए चुना था, लेकिन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता का अभाव एक बड़ी समस्या बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सड़कों और रेलमार्गों का निर्माण नहीं होगा, तब तक घरों का निर्माण शुरू करना संभव नहीं है। इस स्थिति से आवास की कमी से जूझ रहे लोगों को निराशा हो सकती है। सरकार इस मामले को सुलझाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन धन की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। इस देरी से परियोजना की समय सीमा और लागत पर भी असर पड़ सकता है।