हाल ही में घरेलू कामगारों को नियुक्ति पत्र जारी करने और उनके वेतन का भुगतान इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप या रसीद के माध्यम से करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, मान्यता मिलने के बावजूद, इन कामगारों को अभी भी कई अधिकारों से वंचित रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए एक समयोचित नीति की आवश्यकता है। वर्तमान में, अधिकांश घरेलू कामगार अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे उनके अधिकारों का हनन होता है। एक स्पष्ट नीति उनके रोजगार की शर्तों, वेतन और सामाजिक सुरक्षा को विनियमित करने में मदद करेगी। नीति के प्रभावी कार्यान्वयन से घरेलू कामगारों के जीवन में सुधार हो सकता है और उन्हें सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिल सकती हैं। इस दिशा में सरकार और संबंधित हितधारकों से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा है।