देश में आगामी सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। दोनों ही प्रमुख उम्मीदवार लोकतंत्र की बात कर रहे हैं, लेकिन वे किस प्रकार के लोकतंत्र की वकालत कर रहे हैं, इस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र के मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उम्मीदवारों द्वारा लोकतंत्र की अवधारणा को स्पष्ट करने की कमी चिंताजनक है। यह स्थिति मतदाताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकती है, क्योंकि उन्हें यह समझने में कठिनाई हो सकती है कि प्रत्येक उम्मीदवार वास्तव में क्या प्रस्तावित कर रहा है। इस प्रवृत्ति से देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थानों के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। 'ला सिल्ला वाकिया' में प्रकाशित एक लेख में इस मुद्दे को 'त्रासद यथार्थवाद' के रूप में वर्णित किया गया है।