जोस मिगुएल डेलपियाजो के अनुसार, अगस्त 2022 के अंत में उनसे एक दस्तावेज तैयार करने का अनुरोध किया गया था। यह दस्तावेज एक समझौते को लागू होने से रोकने के लिए था, क्योंकि शिपयार्ड एक वैध गारंटी प्रदान करने में देरी कर रहा था। इस देरी के कारण, रक्षा मंत्रालय ने समझौते को अस्थायी रूप से रोकने की योजना बनाई थी। बाद में, एक झूठी गारंटी का पता चला, जिससे यह मामला और भी उजागर हो गया। डेलपियाजो ने बताया कि यह दस्तावेज शिपयार्ड द्वारा वैध गारंटी स्थापित करने में विफल रहने के कारण तैयार किया गया था। यह घटनाक्रम रक्षा अनुबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों को जन्म देता है। मामले की आगे जांच जारी है।
