इंडोनेशिया में अशुरा दिवस को अक्सर अनाथों का त्योहार कहा जाता है। यह नामकरण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों से जुड़ा है। माना जाता है कि इस दिन हज़रत इमाम हुसैन, पैगंबर मुहम्मद के पोते, कर्बला में शहीद हुए थे। इस घटना के बाद, उनके परिवार और समर्थकों ने अनाथों और ज़रूरतमंदों की मदद करने का संकल्प लिया। इसलिए, अशुरा के दिन अनाथों को विशेष रूप से दान-धर्म और सहायता प्रदान की जाती है। यह दिन शोक और सहानुभूति के साथ-साथ करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। इंडोनेशिया में, अशुरा को धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है, जिसमें अनाथों के लिए विशेष आयोजन भी शामिल होते हैं।
