चेक गणराज्य में 2013 से लागू एक भ्रष्टाचार-रोधी उपाय को पिछले साल पेट्र फियाला की सरकार ने चुपचाप कमजोर कर दिया था। आंद्रेई बाबीश सरकार के कुछ मंत्रियों ने इसका फायदा उठाया और इस साल अपने सलाहकारों और उनके वेतन की सूची जारी नहीं की है। वे इसे अगले साल फरवरी में जारी करेंगे। पारदर्शिता अंतर्राष्ट्रीय नामक भ्रष्टाचार-रोधी संगठन ने इस स्थिति की तीखी आलोचना की है। इस कदम से सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह जनता के जानने के अधिकार का उल्लंघन है। सरकार का कहना है कि यह तकनीकी बदलाव था और इसका इरादा पारदर्शिता को कम करना नहीं था। इस मामले ने चेक गणराज्य में राजनीतिक बहस छेड़ दी है।