जुलाई में तुर्की के अंकारा में होने वाली नाटो शिखर वार्ता में चेक गणराज्य का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, यह सरकार तय करेगी। राष्ट्रपति पेट्र पावेल इस बार शिखर वार्ता में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने पहले ही संकेत दिया है कि यदि सरकार उन्हें भाग लेने की अनुमति नहीं देती है, तो वे सक्षम न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। राष्ट्रपति और सरकार के बीच इस मुद्दे पर मतभेद हैं। सरकार अब तय करेगी कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कौन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेगा। यह निर्णय चेक गणराज्य की विदेश नीति और नाटो के साथ संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगा। शिखर वार्ता में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और सुरक्षा मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
