राष्ट्रपति ने न्यायाधीश जॉर्ज अराय्या के जवाब में संगठित अपराध द्वारा न्यायिक शाखा में घुसपैठ के आरोपों को फिर से दोहराया है। इस प्रतिक्रिया में, उन्होंने लौरा फर्नांडीज के पूर्व के बयानों का समर्थन किया, जिसमें न्यायिक प्रणाली में आपराधिक तत्वों के प्रवेश की बात कही गई थी। राष्ट्रपति ने न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और भ्रष्टाचार से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। यह मामला देश में न्यायिक प्रणाली की अखंडता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। सरकार इस मुद्दे की गंभीरता से जांच कर रही है और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति ने न्यायिक अधिकारियों से इस मामले में पूरी तरह से सहयोग करने का आग्रह किया है। इस घटनाक्रम से देश की न्याय व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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