कांगो के पूर्वी भाग में इबोला के प्रकोप से अब तक कम से कम 2000 लोगों की जान जा चुकी है, और यह बीमारी पहले कभी नहीं देखी गई गति से फैल रही है। अब तक 4381 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 2011 घातक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला इस साल फरवरी से ही कांगो में फैल रहा था, हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसे मई के मध्य में ही पहचान मिली थी। कुछ शुरुआती मरीजों को ग़लती से मलेरिया या टाइफाइड समझा गया, जिससे वायरस को ट्रैक करने में देरी हुई। इस महामारी को संघर्ष, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और गलत सूचनाओं ने और बढ़ा दिया है, जिसके कारण मरीजों को अलग करना और संक्रमण को रोकना मुश्किल हो रहा है। यह इबोला का दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप है, और विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संक्रमण दर आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। इबोला एक गंभीर और संक्रामक बीमारी है जो शरीर में रक्तस्राव का कारण बनती है।