हाल ही में फ्रांस के एवियन-लेस-बेंस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में चीन की भूमिका की सराहना की। ट्रंप ने बीजिंग और मॉस्को को एक बड़ी वैश्विक आपदा को रोकने का श्रेय दिया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि चीन अपनी सैन्य क्षमता के बावजूद संयम बरतने का विकल्प चुन रहा था। यह स्थिति एक वर्ष पहले की तुलना में काफी अलग और अप्रत्याशित नजर आती है। चीन की यह रणनीति शक्ति के प्रत्यक्ष प्रदर्शन के बजाय रणनीतिक तटस्थता पर आधारित है। इस दृष्टिकोण के माध्यम से बीजिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को संतुलित कर रहा है। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में अमेरिका, चीन और ईरान के बीच बदलते समीकरणों को दर्शाता है।