चीन ने बुधवार को कहा कि उसका नया ‘जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून’ उसे अपनी सीमाओं के बाहर के लोगों को भी लक्षित करने का ‘वैध’ अधिकार देता है। यह कानून 1 जुलाई से लागू होगा और इसका उद्देश्य जातीय एकता को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समूहों को और हाशिए पर धकेलने के लिए किया जा सकता है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि यह कानून देश में जातीय सद्भाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। आलोचकों का तर्क है कि यह कानून चीन को विदेशों में रहने वाले उइगरों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर नियंत्रण रखने के लिए एक उपकरण प्रदान करेगा। इस कानून के दायरे और संभावित प्रभावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह कानून चीन की घरेलू नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
