चिली में प्रस्तावित सुधारों को लेकर मानवाधिकार पर्यवेक्षक ने चेतावनी जारी की है। पर्यवेक्षक का कहना है कि ये सुधार अधिकारों और संस्थानों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। सरकार द्वारा 240 दिनों तक की आपातकालीन स्थिति का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत संसदीय अनुमोदन के बिना आवागमन और सभा करने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस कदम से चिली में नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पर्यवेक्षक ने सरकार से इन सुधारों पर पुनर्विचार करने और मानवाधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया है। यह चिंता व्यक्त की गई है कि आपातकालीन स्थिति का लंबा समयकाल अधिकारों के हनन का कारण बन सकता है। सुधारों के संभावित परिणामों को लेकर नागरिकों और मानवाधिकार संगठनों में भी चिंता है।