चिली में, 67 पूर्व संसदीय सलाहकारों को पहले पद से हटाकर मुआवजा दिया गया, फिर उन्हें चुनावी प्रचार में शामिल होने की अनुमति मिली, और बाद में उन्हें फिर से नियुक्त किया गया। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। CIPER Chile की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन सलाहकारों को हटाने और फिर से नियुक्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह चुनावी प्रभाव डालने की कोशिश का संकेत देती है। आलोचकों का कहना है कि यह सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को खतरे में डालता है। इस पुनर्नियुक्ति से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मामले की जांच की मांग की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह घटना चिली की राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता के मुद्दों पर प्रकाश डालती है।