चिली की संसद ने 2024 से 2026 के बीच अपने 489 संसदीय सलाहकारों को 2.4 बिलियन डॉलर (लगभग) का मुआवज़ा दिया। जांच में पता चला है कि मुआवज़ा देने के बाद, इनमें से कई सलाहकारों को फिर से नियुक्त किया गया। यह मामला CIPER चिली द्वारा उजागर किया गया है। इस वित्तीय लेन-देन ने पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया अनावश्यक खर्च और संभावित भ्रष्टाचार का संकेत देती है। संसद ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। इस खुलासे के बाद, विपक्ष ने संसद से जवाबदेही की मांग की है।
