आठ वर्षीय एक बच्चे के स्कूल में हिंसा का शिकार होने के बाद, उसके पिता उसके एक बयान से चिंतित हो गए: "मैंने भी उकसाया, मैं इसके लायक था"। यह बयान बच्चे में हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। स्कूल प्रशासन ने इस मामले को कम करके आंका और इसे बच्चों के विकास का एक सामान्य हिस्सा बताया। बच्चे के पिता का मानना है कि स्कूल ने स्थिति की गंभीरता को नहीं समझा। यह घटना बच्चों के बीच हिंसा और स्कूलों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाती है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और उन्हें हिंसा के चक्र में फंसा सकती हैं। इस मामले ने बच्चों में भावनात्मक समर्थन और स्कूलों में हिंसा के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।