बच्चों के भरण-पोषण का खर्च एक निश्चित तालिका या वेतन के प्रतिशत पर आधारित नहीं है। 2012 के कानून क्रमांक 42 के अनुसार, अदालतों को आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करना होगा। इसका अर्थ है कि अदालतें, बच्चे की वास्तविक ज़रूरतों और पालन-पोषण करने वाले व्यक्ति की आय का मूल्यांकन करेंगी। यह मूल्यांकन यह सुनिश्चित करेगा कि खर्च उचित और बच्चे के लिए पर्याप्त हो। प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा, जिससे एक न्यायसंगत परिणाम सुनिश्चित हो सके। इस कानून का उद्देश्य बच्चों के कल्याण को प्राथमिकता देना और उनकी ज़रूरतों को पूरा करना है। अदालतों को इस प्रक्रिया में सभी प्रासंगिक कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है।