आपदा के शुरुआती दिनों में एक पूर्वानुमानित घटना घटती है। समाज में अराजकता फैलती है, वहीं प्रतिक्रिया देने वाली संस्थाएं व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करती हैं। लोग समन्वय स्थापित करने में सक्षम व्यक्तियों की अपेक्षा करते हैं। यह लेख इस विरोधाभास पर प्रकाश डालता है - कि कैसे संकट के समय में, व्यवस्था बहाल करने के प्रयास भी कभी-कभी अव्यवस्था का कारण बन सकते हैं। यह दर्शाता है कि संस्थानों का प्रतिक्रिया तंत्र कितना महत्वपूर्ण है। यह समाज और संस्थानों की प्रतिक्रियाओं के बीच के गतिशील संबंध को दर्शाता है। Rafael Uzcátegui का यह लेख, 'TalCual' में प्रकाशित हुआ है, इस विषय पर एक विचारोत्तेजक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।