व्हाइट हाउस पर कुछ हफ़्तों से खाद्य उद्योग के प्रमुख अधिकारियों का दबाव है। वे अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की नई नीति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस नीति के तहत खाद्य पदार्थों की परिभाषा तय करने से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। सीईओ का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। वे नीति में देरी करने या इसे संशोधित करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला खाद्य उद्योग और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। इस नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प चुनने में मदद करना है, लेकिन उद्योग इसे अपने मुनाफे के लिए खतरा मान रहा है।