संसदीय समिति ने केंद्रीय बैंक के गवर्नर के कार्यकाल को पांच साल से घटाकर तीन साल करने का प्रस्ताव दिया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दो साल का विस्तार संभव है। पूर्व गवर्नरों ने चेतावनी दी है कि यह बदलाव बैंक को राजनीतिक दबाव के प्रति संवेदनशील बना सकता है, खासकर तब जब स्थिरता की आवश्यकता हो। आलोचकों का कहना है कि इस बदलाव से केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है। समिति का तर्क है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और प्रदर्शन में सुधार होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाएगी। इस प्रस्ताव पर अभी सरकार को अंतिम निर्णय लेना है। यह निर्णय देश की आर्थिक नीति और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण होगा।