संसद ने उपभोक्ता कीमतों में अनुचित वृद्धि पर निगरानी रखने के लिए नियामक निकायों के अधिकार क्षेत्र को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। नए कानून के तहत, कंपनियों को अब यह साबित करना होगा कि उनकी कीमतें आर्थिक रूप से उचित हैं। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपनी मूल्य निर्धारण रणनीतियों का औचित्य प्रस्तुत करना होगा। यह कदम बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि यह कानून बाजार में पारदर्शिता लाएगा और अनुचित मूल्य वृद्धि को रोकेगा। उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून से व्यवसायों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ पड़ने की संभावना है।