ब्रिटेन में 23 जून 2016 को ब्रेक्सिट जनमत संग्रह के बाद से ही लोकलुभावनवाद (पॉपुलिज्म) की लहर ने पश्चिमी राजनीति के स्थापित नियमों को बदल दिया। अब, इस ऐतिहासिक घटना के दस साल बाद, ब्रिटेन अपने सातवें प्रधानमंत्री को चुनने की तैयारी कर रहा है। एक दशक पहले किए गए वादों का भूत आज भी देश को परेशान कर रहा है। पिछले दस वर्षों में छह प्रधानमंत्री बदल चुके हैं, जो राजनीतिक अस्थिरता का संकेत है। ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में भी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन एक खोए हुए दशक का सामना कर रहा है, जहाँ राजनीतिक विभाजन और आर्थिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यह स्थिति पश्चिमी देशों के लिए एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।
