ब्रेक्सिट को लेकर पिछले दस वर्षों में जो अपेक्षाएं थीं, वे पूरी नहीं हो पाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेक्सिट ने यूरोप और अमेरिका में मौजूद पॉपुलिस्ट, पहचान-आधारित और सत्तावादी विचारधाराओं को बढ़ावा नहीं दिया। बल्कि, यह उन संरचनात्मक प्रक्रियाओं का एक बड़ा प्रदर्शन था जो पहले से ही चल रही थीं। ब्रेक्सिट एक कारण नहीं, बल्कि एक परिणाम था। यह यूरोप में बढ़ते असंतोष और राजनीतिक बदलावों का प्रतीक बन गया। इस घटना ने यूरोपीय देशों में राष्ट्रीय पहचान और संप्रभुता के मुद्दों को फिर से उजागर किया। ब्रेक्सिट के बाद व्यापार और आर्थिक संबंधों में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं, जिनका प्रभाव अभी भी जारी है।
