किडापावान के रोमन कैथोलिक डायोसीस के बिशप ने भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के मूल कारण को स्वार्थ बताया है। उनका मानना है कि व्यक्तिगत लाभ की प्राथमिकता ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। बिशप ने समाज में व्याप्त नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त की है और सामूहिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने से परे दूसरों के बारे में सोचना बंद कर देते हैं, तो भ्रष्टाचार पनपने लगता है। बिशप ने सभी नागरिकों से ईमानदारी और निस्वार्थता के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि केवल नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ही समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त कर सकती है। इस बयान से समाज में नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस छिड़ सकती है।
