प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट की जांच में एक 27 अरब रुपये के वित्तीय अपराध का खुलासा हुआ है। यह मामला बैंकों से ऋण, कागजी जमीनी सौदों, क्रेडिट से वित्त पोषित शेयर ट्रेडिंग और कथित बाजार में हेरफेर से जुड़ा है। जांच में भट्ठा-अग्रवाल सिंडिकेट नामक एक समूह की भूमिका सामने आई है, जिसके तार बैंकों, ब्रोकरों और बीमा कंपनियों तक जुड़े हुए हैं। आरोप है कि इस सिंडिकेट ने विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं के माध्यम से अवैध रूप से धन अर्जित किया। यह घोटाला कॉर्पोरेट ऋणों और शेयर बाजार में धोखाधड़ी से संबंधित है। मामले में आगे जांच जारी है और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला भारतीय वित्तीय प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमजोर नियामक निरीक्षण पर सवाल खड़े करता है।