दोनाना क्षेत्र में एशियाई भृंग के प्रसार को रोकने में अप्रत्याशित रूप से मधुमक्खियाँ और मेंढक सहयोगी साबित हो रहे हैं। 'एल बुरीतो फेलिज़' नामक संगठन द्वारा किए गए एक परियोजना में यह बात सामने आई है कि प्रकृति स्वयं ही आक्रमणकारी प्रजातियों से निपटने के लिए अपनी रक्षा प्रणाली विकसित कर सकती है। मधुमक्खियाँ और मेंढक, भृंग के लार्वा और वयस्क कीटों को खाकर उनकी आबादी को नियंत्रित करने में मदद कर रहे हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने से जैविक नियंत्रण संभव है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में अन्य आक्रमणकारी प्रजातियों से निपटने के लिए नई रणनीतियाँ विकसित करने में सहायक हो सकती है। यह प्रकृति के लचीलेपन और अनुकूलन क्षमता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस परियोजना से यह स्पष्ट होता है कि संरक्षण प्रयासों में स्थानीय प्रजातियों की भूमिका को समझना आवश्यक है।
