एक सेवानिवृत्त महिला, रीता एम., के लॉकर में सेंध लगने से ३.९१ लाख यूरो का नुकसान हुआ है और वह मुआवजे के लिए संघर्ष कर रही हैं। बैंक ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी प्राथमिकता शेयरधारकों और निवेशकों की है। रीता एम. का कहना है कि बैंक को ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी। यह घटना लॉकर की सुरक्षा और बैंकों की जवाबदेही पर सवाल उठाती है। बैंक के इस रुख से रीता एम. और अन्य ग्राहक निराश हैं। फिलहाल, रीता एम. कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही हैं ताकि वह अपने नुकसान की भरपाई कर सकें। यह मामला जर्मनी में बैंकिंग सुरक्षा और ग्राहक अधिकारों पर बहस को जन्म दे सकता है।