सरकार शरणार्थियों के दावों के तेज़ी से निपटान करने की बात कह रही है, लेकिन वकीलों ने इस प्रक्रिया में जल्दबाजी पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बिना मौखिक सुनवाई के मामलों का निपटान करने से वास्तविक शरणार्थियों के दावों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। वकीलों का तर्क है कि उचित प्रक्रिया का पालन करना महत्वपूर्ण है ताकि हर मामले को सही ढंग से सुना जा सके। वे इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि जल्दबाजी में लिए गए फ़ैसलों से न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। आलोचकों का मानना है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मौखिक सुनवाई आवश्यक है। सरकार का दावा है कि त्वरित निपटान से शरण प्रणाली पर बोझ कम होगा, लेकिन वकीलों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और हर शरणार्थी के अधिकारों की रक्षा करने की अपील कर रहे हैं।