फ्रांस की अदालत ने 10 जून 2026 को परमाणु ऊर्जा कंपनी अरेवा के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। अरेवा पर 2010 में नाइजर के अर्लिट यूरेनियम खदान के पास पांच फ्रांसीसी, एक मलगैसी और एक टोगोली नागरिक के अपहरण के लिए अल-कायदा के खतरे को कम आंकने का आरोप है। पीड़ितों में से एक, पियरे लेग्रैंड के वकील ओलिवियर मोरीस ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा प्रक्रिया में देरी पर खेद जताया है। अदालत का यह निर्णय अपहरण की परिस्थितियों और अरेवा की संभावित लापरवाही की जांच को आगे बढ़ाएगा। यह मामला फ्रांस में राष्ट्रीय सुरक्षा और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी से जुड़े सवालों को उठाता है। पीड़ित लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे थे और इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अदालत में अरेवा को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।