चिली में ‘अनाटोसिसमो’ के नाम से चर्चित चक्रवृद्धि ब्याज को लेकर एक विवाद बढ़ता जा रहा है। यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या बैंकों को ब्याज पर ब्याज लगाने का अधिकार होना चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि यह प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए अनुचित और शोषणकारी है, खासकर कर्जदारों के लिए। वे इसे एक छिपे हुए शुल्क के रूप में देखते हैं जो ऋण की वास्तविक लागत को बढ़ाता है। दूसरी ओर, बैंक इस अभ्यास को उचित ठहराते हैं, यह कहते हुए कि यह उनके परिचालन खर्चों और जोखिमों को कवर करने के लिए आवश्यक है। इस मुद्दे पर कानूनी और नियामक अनिश्चितता बनी हुई है, और उपभोक्ता संरक्षण समूहों ने इस प्रथा को समाप्त करने का आह्वान किया है। अभी यह देखना बाकी है कि इस विवाद का समाधान कैसे किया जाएगा और इसका वित्तीय प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ेगा।