यूटा शिमोत्सु की दूसरी फिल्म महत्वाकांक्षी विचारों को प्रस्तुत करती है, लेकिन कहानी कहने में कुछ कमजोरियाँ हैं। फिल्म में मानव पिरामिड और जिम्नास्टिक संरचनाओं का उपयोग एक प्रतीकात्मक रूपक के तौर पर किया गया है, जो फिल्म के संदेश को और गहरा करता है। हालांकि, फिल्म की विषय-वस्तु व्यापक है, लेकिन उसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में कठिनाई हुई है। समीक्षकों का मानना है कि फिल्म में क्षमता है, लेकिन यह अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पाती। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति में संतुलन बनाने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर, यह फिल्म एक दिलचस्प प्रयास है, लेकिन इसमें कुछ सुधार की गुंजाइश है। यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से संतोषजनक अनुभव प्रदान नहीं करती।