स्वीडन में किए गए एक शोध के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के माध्यम से मृत्यु के बाद भी जीवन जीने की संभावना बन सकती है। उप्साला विश्वविद्यालय के शोधकर्ता कार्ल ओमान के अनुसार, चैट जीपीटी जैसी तकनीकों का उपयोग करके किसी व्यक्ति के डिजिटल अवतार का निर्माण किया जा सकता है। यह अवतार व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी यादों और व्यक्तित्व को जीवित रख सकता है। कई लोग अपने निधन के बाद डिजिटल रूप में मौजूद रहने के विचार को स्वीकार करने को तैयार हैं। यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में यह लोगों के जीवन और मृत्यु के दृष्टिकोण को बदल सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि एआई के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा और बातचीत के पैटर्न का विश्लेषण करके, एक यथार्थवादी डिजिटल अवतार बनाया जा सकता है। इससे प्रियजनों को खोए हुए लोगों से जुड़ने का एक नया तरीका मिल सकता है।