मानवाधिकार संगठनों ने आयातित वस्तुओं में ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने माल को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में कमज़ोरी बताई है। उनका कहना है कि वर्तमान कानून मुख्य रूप से श्रमिकों के शोषण को संबोधित करते हैं, लेकिन विदेशों में ज़बरदस्ती मज़दूरी करवाकर बनाए गए सामानों के आयात पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखते। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि एक स्पष्ट और मज़बूत कानून की आवश्यकता है जो ऐसे उत्पादों को देश में प्रवेश करने से रोके। इससे उन कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जा सकेगा जो इस तरह के अमानवीय प्रथाओं से लाभान्वित होती हैं। यह कानून वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा होगी और शोषण के खिलाफ एक मजबूत संदेश जाएगा। इस मुद्दे पर सरकार से जल्द कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई जा रही है।