फ़िगारो द्वारा देखे गए एक न्यायिक दस्तावेज़ से पता चला है कि प्रेस्सिलिया नामक एक युवती द्वारा दर्ज की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर उचित ध्यान नहीं दिया गया। इस मामले में, शिकायतकर्ता के खिलाफ गवाही को मनोचिकित्सकीय विशेषज्ञता से ज़्यादा महत्व दिया गया, जिसमें यौन शोषण की आशंका व्यक्त की गई थी। यह मामला जेरोम बरेला के पिता के खिलाफ दायर की गई शिकायत से पहले का है। दस्तावेज़ से पता चलता है कि प्रेस्सिलिया ने पहले भी मदद के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। जांच में कमज़ोरियाँ उजागर हुई हैं, जिससे पीड़ित के अधिकारों पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला फ्रांसीसी न्याय प्रणाली में यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी प्रकाश डालता है। इस खुलासे से बरेला मामले की जांच पर भी असर पड़ सकता है।