११ सितंबर, २००१ को हुए हमलों के कथित मास्टरमाइंड पर, दो दशकों से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बावजूद, अभी तक मुकदमा नहीं चला है। वह एक कानूनी गतिरोध में फंसा हुआ है, जिसके लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) द्वारा की गई यातनाएं ज़िम्मेदार हैं। इन यातनाओं के कारण प्राप्त सबूतों की स्वीकार्यता पर सवाल उठ रहे हैं, जिसके चलते मुकदमा आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस मामले ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यातना के माध्यम से प्राप्त जानकारी का उपयोग करके किसी व्यक्ति को दंडित करना मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। इस जटिल स्थिति के कारण, मास्टरमाइंड अभी भी बिना किसी कानूनी नतीजे के है। यह मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित है और न्याय की मांग कर रहा है।