आगामी विश्व कप 2026, पिछले टूर्नामेंटों की तुलना में लगभग दोगुनी ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करेगा। इसका मुख्य कारण है टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों की संख्या में वृद्धि और उनसे जुड़ी लंबी दूरी की हवाई यात्राएं। विश्लेषकों का अनुमान है कि यात्रा संबंधी उत्सर्जन में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह विश्व कप अब तक का सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाला टूर्नामेंट बन सकता है। आयोजन समिति और फीफा पर टिकाऊ समाधान खोजने का दबाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर पर्यावरण समूहों ने चिंता व्यक्त की है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। भविष्य में, टूर्नामेंट के आयोजन में पर्यावरण संबंधी कारकों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।