कुछ लोगों की आदत थी कि वे दूसरों को नापसंद नामों से बुलाते थे। इसी आदत के संबंध में सूरह अल-हुजुरात की आयत ११ अवतरित हुई। यह आयत लोगों को दूसरों को अपमानजनक उपनामों से बुलाने से मना करती है और उन्हें अच्छी बातें बोलने का आदेश देती है। यह घटना उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो दूसरों का मजाक उड़ाते हैं या उन्हें नीचा दिखाते हैं। आयत में बताया गया है कि किसी भी व्यक्ति को बुरा नाम नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे उसके सम्मान को ठेस पहुँचती है। इस्लाम में सभी मनुष्यों को सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने का निर्देश दिया गया है। इस आयत का उद्देश्य लोगों को सामाजिक शिष्टाचार का पालन करने और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देना है।