हीउमा द्वीप के तट के पास, प्रथम विश्व युद्ध के समय के डूबे हुए जर्मन युद्धपोतों में हजारों लीटर तेल भरा हुआ है। ये युद्धपोत, जो 1916 में डूबे थे, अब पारिस्थितिक खतरा बन गए हैं। यदि तेल का रिसाव होता है, तो यह बाल्टिक सागर के तटों को प्रदूषित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों में मौजूद तेल समय के साथ खराब हो रहा है और रिसाव का खतरा बढ़ रहा है। इस संभावित आपदा से निपटने के लिए अधिकारियों को तैयारी करनी होगी। तेल रिसाव समुद्री जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। स्थिति की निगरानी की जा रही है और संभावित रिसाव को रोकने के उपाय तलाशे जा रहे हैं।