'द सोशल रेकनिंग' नामक पुस्तक में, मार्क ज़ुकेरबर्ग को सिलिकॉन वैली के एक निर्दयी शासक के रूप में चित्रित किया गया है। यह पुस्तक फेसबुक की स्थापना और विकास की पड़ताल करती है, और ज़ुकेरबर्ग के नेतृत्व के बारे में कई आलोचनात्मक बातें सामने लाती है। पुस्तक में ज़ुकेरबर्ग पर सत्ता और लाभ के लिए नैतिकता से समझौता करने का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि फेसबुक ने जानबूझकर गलत सूचना और हानिकारक सामग्री को फैलने दिया, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। 'द सोशल रेकनिंग' फेसबुक के शुरुआती दिनों के अंदरूनी विवरणों को उजागर करती है, और यह दिखाती है कि कैसे कंपनी ने अपने शुरुआती आदर्शों से भटक गई। यह पुस्तक सोशल मीडिया की शक्ति और ज़िम्मेदारी पर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है, और ज़ुकेरबर्ग की विरासत पर बहस को जन्म दे सकती है।