मध्य जावा के सेमरांग शहर में 'सिंधु लारस बोचा' केंद्र के माध्यम से बच्चे पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहाँ बच्चे विशेष रूप से 'वायांग कुलित' (छाया कठपुतली) और 'करावितन' (पारंपरिक संगीत) की बारीकियों को सीख रहे हैं। रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित इस सत्र में बच्चों ने उत्साहपूर्वक कठपुतली संचालन का अभ्यास किया। केंद्र के प्रबंधकों के अनुसार, यह प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पारंपरिक कलाओं के प्रति रुचि जगाना और उन्हें संरक्षित करना है। यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक प्रभावी प्रयास है।