विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ते संबंध किम जोंग-उन पर चीन के प्रभाव को कम कर रहे हैं। हाल ही में शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग का उद्देश्य रूस के बढ़ते प्रभाव को कम करना और उत्तर कोरिया के साथ चीन के संबंधों को मजबूत करना था। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन उत्तर कोरिया को रूस के करीब जाते हुए नहीं देखना चाहता है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। शी जिनपिंग की यात्रा का उद्देश्य यह संदेश देना भी था कि चीन उत्तर कोरिया के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। इस स्थिति में, चीन उत्तर कोरिया पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है।
