शरद ऋतु के एक सुहावने सुबह लेखक मित्र उत्सव समाप्त होने के बाद भी मन वहीं ठहरने को विवश था। देश भर से आए लेखकों से सीखने की लालसा और उनके साथ जुड़ने का आकर्षण मन में गहरा उतर गया था। यह उत्सव सीखने की एक सतत प्रक्रिया है, जो बचपन से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक चलती रहनी चाहिए। लेखक मित्र उत्सव सिर्फ ज्ञान प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लेखकों को एक दूसरे को जानने, समझने और प्रेम करने का अवसर प्रदान करता है। यह मित्रता का एक ऐसा बंधन है जो दिलों में हमेशा जीवित रहेगा। यह उत्सव एक ऐसे मंदिर की तरह है जहाँ स्नेह और ज्ञान का वास है और जहाँ लेखकों के मन सदैव के लिए बसे रहेंगे।