विश्व कप के दौरान मैचों में दिए गए तीन मिनट के 'पानी ब्रेक' को लेकर आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि ये ब्रेक खेल में व्यवधान डालने के साथ-साथ व्यावसायिक लाभ कमाने का एक तरीका हैं। फीफा पर आरोप है कि इन ब्रेकों के माध्यम से वह प्रायोजकों को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, फीफा का कहना है कि ये ब्रेक खिलाड़ियों की सुरक्षा और हाइड्रेशन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थे, खासकर कतर की गर्मी को देखते हुए। इन ब्रेकों के दौरान खिलाड़ियों, कोचों और प्रशंसकों के बीच एक सकारात्मक माहौल देखने को मिला। इस मुद्दे पर बहस जारी है कि क्या ये ब्रेक वास्तव में खिलाड़ियों के हित में थे या सिर्फ एक व्यावसायिक रणनीति।
