फुटबॉल विश्व कप में 'ड्रिंक ब्रेक' प्रशंसकों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोचों की एक नई रणनीति है। कोच इन ब्रेकों का उपयोग खिलाड़ियों को निर्देश देने और खेल की रणनीति में बदलाव करने के लिए कर रहे हैं, जिससे यह मैदान पर एक तरह का 'कोचिंग ज़ोन' बन गया है। पहले ये ब्रेक खिलाड़ियों को हाइड्रेटेड रखने के लिए थे, लेकिन अब इनका इस्तेमाल सामरिक लाभ के लिए किया जा रहा है। खेल विश्लेषकों का कहना है कि यह विश्व कप में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जहाँ कोच खेल के दौरान अधिक नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे खेल की गति धीमी हो रही है, लेकिन कोचों को अपनी टीम को व्यवस्थित करने का अतिरिक्त समय मिल रहा है। यह रणनीति खेल के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
