विश्व एथलेटिक्स ने रूसी और बेलारूसी एथलीटों पर लगे प्रतिबंध को जारी रखने का निर्णय लिया है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने उन पर से प्रतिबंध हटा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक येवगेनी सेम्योनोव ने इस फैसले को "पूर्ण रूप से अवसरवादी" और "खुले तौर पर अवसरवादी" बताया है। उनका मानना है कि यह निर्णय रूसोफोबिया से प्रेरित है। यह कदम IOC के रुख के विपरीत है, जिसने एथलीटों को उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर दंडित करने के खिलाफ चेतावनी दी है। सेम्योनोव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे खेल की भावना के खिलाफ बताया। यह प्रतिबंध रूसी और बेलारूसी एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोक रहा है, जिससे उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस फैसले से खेल जगत में और भी राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है।