एक विश्लेषण के अनुसार, गठबंधन की प्रस्तावित पवन ऊर्जा नीति से देश में लगभग 3.9 खरब रुपये के स्थानीय वेतन और 200 मिलियन डॉलर से अधिक के भू-स्वामित्व और सामुदायिक भुगतान खतरे में पड़ सकते हैं। इस नीति के कारण ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। अनुमान है कि लगभग 26,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास को बाधित कर सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि भू-स्वामियों और समुदायों को मिलने वाली आय कम हो सकती है। सरकार इस नीति के संभावित परिणामों का मूल्यांकन कर रही है। यह विश्लेषण पवन ऊर्जा क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता के महत्व को दर्शाता है।