तालिबान के सत्ता में आने के पांच साल बाद अब एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दुनिया यह देख रही है कि क्या पश्चिमी देशों के पास अभी भी कोई प्रभाव बचा है। इस स्थिति में पश्चिमी देशों की बातचीत करने की क्षमता पर संदेह जताया जा रहा है। विश्लेषण यह है कि क्या उनके पास अब भी प्रभावी बातचीत के साधन उपलब्ध हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान की स्थिति काफी जटिल हो चुकी है। यह मुद्दा राजनयिक संबंधों और प्रभाव की कमी को दर्शाता है। कुल मिलाकर, पश्चिम और तालिबान के बीच संबंधों का भविष्य अनिश्चित नजर आता है।