एक नए अध्ययन के अनुसार, दुनिया की सबसे धनी 10% आबादी प्रति व्यक्ति सालाना 2300 से 7500 अमेरिकी डॉलर के बराबर का पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाती है। यह नुकसान भोजन की खपत और बिजली के उपयोग जैसे कारकों से उत्पन्न होता है। अध्ययन में पाया गया कि यह शीर्ष आबादी पर्यावरण पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डाल रही है, जो अरबों डॉलर में आंका गया है। यह आंकड़ा औसत से काफी अधिक है, जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय प्रभावों में असमानता को दर्शाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस असमानता को संबोधित करना सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है। निष्कर्षों से पता चलता है कि धनी देशों और व्यक्तियों को अपनी जीवनशैली के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यह अध्ययन पर्यावरण संरक्षण के लिए नीतिगत बदलावों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।