वाटरलू के युद्ध के दौरान भारी बारिश के कारण युद्धक्षेत्र कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया था। 17 जून की शाम को शुरू हुई मूसलाधार बारिश सुबह तक जारी रही, जिससे मिट्टी धंस गई और सैनिकों को पानी में सोना पड़ा तथा तोपें कीचड़ में धंस गईं। इस स्थिति के कारण नेपोलियन को अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा। बारिश ने न केवल युद्ध के मैदान को प्रभावित किया, बल्कि उस समय के बाज़ार पर भी गहरा असर डाला। युद्ध के परिणाम बांड बाजार में भी महसूस किए गए, जिससे वित्तीय अस्थिरता पैदा हुई। इस प्रकार, वाटरलू की लड़ाई केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं थी, बल्कि यह आर्थिक मोर्चे पर भी लड़ी गई थी। यह घटना इतिहास में युद्ध और वित्त के बीच जटिल संबंध को दर्शाती है।
