जलवायु परिवर्तन समुद्री कछुओं के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। कछुओं में लिंग निर्धारण अंडे के ऊष्मायन के दौरान तापमान से होता है। वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण, कुछ क्षेत्रों में अब केवल मादा कछुए ही जन्म ले रहे हैं। यह स्थिति कछुओं की प्रजनन क्षमता को कम कर सकती है और उनकी आबादी को खतरे में डाल सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह असंतुलन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और कछुओं के घोंसले के स्थानों की सुरक्षा करना शामिल है। भविष्य में, कछुओं की आबादी को बचाने के लिए कृत्रिम ऊष्मायन जैसी तकनीकों पर भी विचार किया जा सकता है।
